मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी और शी-जिनपिंग की मुलाक़ात
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दुनिया के दो बड़े देश…….nat ….दो बड़ी अर्थव्यवस्था और अपनी अलग शैली के लिए जाने-जाने वाले दो नेता।……NAT………. प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग की होने वाली दूसरी अनौपचारिक मुलाक़ात पर निगाहें सभी की टिक गईं हैं।……nat…… 11 अक्टू. को शी-जिनपिंग जब चेन्नई पहुंचेंगे तो वुहान में पिछले साल हुई पहली अनौपचारिक मुलाक़ात की तस्वीरें एक बार फिर सामने होंगी। बिना समय की पाबंदी, बिना किसी तयशुदा एजेंडे की इस बातचीत में दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुख आपसी हित के मसौदे पर एक अलग रणनीति बनाने की कोशिश में होंगे।

चेन्नई से तकरीबन 50 किमी. दूर सांस्कृतिक नगरी और विश्व धरोहर में शामिल मामल्लापुरम (महाबलिपुरम) में मोदी और शी-जिनपिंग की अहम वार्ता होगी। इस द्विपक्षीय मुलाक़ात में वैश्विक महत्व पर अहम चर्चा भी हो सकती है। इसमें व्यापार, राजनैतिक संबंध और आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर भी चर्चा होगी।
दोनों नेताओं के आगमन से पहले मामल्लापुरम को सजाया संवारा जा रहा है। भारत-चीन के सांस्कृतिक संबंधों की कड़ी में कांचीपुरम् ज़िले के मामल्लापुरम (महाबलीपुरम्) का काफी अहमियत है। विश्व की धरोहर और द्रविडियन शैली में बने स्मारकों में इतिहासक समाया है। खुदाई के दौरान चीनी मुद्राएं और मिट्टी के बर्तनों के मिलने से ज़ाहिर है कि इस प्राचीन बंदरगाह शहर और पल्लव शासकों की राजधानी रहे नगर का चीन से सदियों पुराना नाता रहा है। इसके अलावा प्रसिद्धि चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी सातवीं सदी में वहां की यात्रा की थी।

चीन में बुद्ध के सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार हो या फिर रेशम पथ के ज़रिए व्यापार। दोनों देशों के बीच सहयोग और समृद्धि का बंधन सूत्र ऐतिहासिक हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की अपनी हर-एक यात्रा या फिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाक़ातों में कूटनीतिक, व्यापारिक और सीमाओं के मुद्दे के साथ-साथ पारंपरिक, सांस्कृतिक रिश्तों को नए आयाम देने की कोशिश की है।

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