निर्भया के दो दोषियों की क्यूरेटिव याचिका खारिज
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— करीब 7 साल के बाद निर्भया के दोषियों को उनके अंजाम तक पहुचने का रास्ता साफ होता नज़र आ रहा है… करीब 7 साल की कानूनी लडाई के बाद आज सर्वोच्य न्यायालय ने 2 आरोपियों की सुधारात्मक याचिकाओं को खारिज कर दिया… एक आरोपी ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल कर दी है और दिल्ली हाईकोर्ट में डैथ वारंट के खिलाफ भी अर्जी दाखिल की है… दिल्ली की एक अदालत पहले ही इन आरोपियों का 22 जनवरी के लिये डेथ वारंट जारी कर चुकी है।
निर्भया के दोषियों की फांसी का रास्ता अब लगभग साफ होता जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सजा पाये चार मुजरिमों में से दो की सुधारात्मक याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने दोषी विनय शर्मा और मुकेश कुमार की सुधारात्मक याचिकाओं पर चैंबर में विचार के बाद उन्हें खारिज कर दिया। पांच न्यायाधीशों की यह सर्वसम्मत राय थी कि इन दोषियों की सुधारात्मक याचिकाओं में कोई दम नहीं है। पीठ ने अपने आदेश में कहा…
मौत की सजा के अमल पर रोक के लिये आवेदन भी अस्वीकार किया जाता है। हमने सुधारात्मक याचिकाओं और संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया है। हमारी राय में रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा एवं अन्य के मामले में 2002 के फैसले में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित मानकों के दायरे में इसमें कोई मामला नहीं बनता है। सुधारात्मक याचिकायें खारिज की जाती हैं।
न्यायाधीशों की इस पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल थे। क्यूरेटिव पिटीशन खारिज होने के बाद निर्भया के माता पिता ने खुशी का इजहार किया और कहा कि हम 22 जनवरी का इंतजार कर रहे हैं जब दोषियों को फांसी पर लटकाया जाएगा और निर्भया को न्याय मिलेगा।
दरअसल दिल्ली की एक अदालत ने सात जनवरी को इस मामले के चारों मुजरिमों को 22 जनवरी को सवेरे सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी के लिए डेथ वारंट जारी किया था। इसके बाद, नौ जनवरी को विनय और मुकेश ने सुधारात्मक याचिका दायर की थी। दो अन्य दोषियों अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता ने अभी तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है। गौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात में चलती बस में छह दरिंदों ने 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार के बाद बुरी तरह से जख्मी हालत में पीड़िता को सड़क पर फेंक दिया था। अपराध में शामिल एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि एक अन्य आरोपी नाबालिग था और उसके खिलाफ किशोर न्याय कानून के तहत कार्यवाही की गयी थी। इस नाबालिग को तीन साल तक सुधार गृह में रखा गया था। मई, 2017 में उच्चतम न्यायालय ने चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखते हुये उनकी अपील खारिज कर दी थी। न्यायालय ने बाद में इन दोषियों की पुनर्विचार याचिकायें भी खारिज कर दी थीं।

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